मोहब्बत विष नहीं होता




ये दुनिया मंच ना होती तो हम मंचन नहीं करते,

मुहब्बत विष नहीं होता तो हम मंथन नहीं करते,

अगर कलियों  से भौंरो का कोई  रिश्ता नहीं होता,

तो कलियाँ लाख सुन्दर हो भ्रमर गुंजन नहीं करते।


ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह



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