तेरी नज़रे
हुआ दीदार है जबसे तेरे जद में मेरी नज़रे,
मुहब्बत में तेरी नज़रे, इबादत में तेरी नज़रे,
मुहब्बत का तराना इस कदर नज़रो ने छेड़ा है,
तेरे छत पे मेरी नज़रे, मेरे छत पे तेरी नज़रे।
जब ये मुहब्बत थोड़ा आगे बढ़ती है तो क्या कठिनाइयां आती है?
कसम से यार दिखती हैं तेरे खत में तेरी नज़रे,
मै मंदिर भी अगर जाऊँ इबादत में तेरी नज़रे,
लगी हो लाख पाबन्दी मगर मुमकिन नहीं है ये,
तेरे हद में तेरी नज़रे , मेरे हद में मेरी नज़रे।
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह।
मुहब्बत में तेरी नज़रे, इबादत में तेरी नज़रे,
मुहब्बत का तराना इस कदर नज़रो ने छेड़ा है,
तेरे छत पे मेरी नज़रे, मेरे छत पे तेरी नज़रे।
जब ये मुहब्बत थोड़ा आगे बढ़ती है तो क्या कठिनाइयां आती है?
कसम से यार दिखती हैं तेरे खत में तेरी नज़रे,
मै मंदिर भी अगर जाऊँ इबादत में तेरी नज़रे,
लगी हो लाख पाबन्दी मगर मुमकिन नहीं है ये,
तेरे हद में तेरी नज़रे , मेरे हद में मेरी नज़रे।
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह।


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